Ancient History of India ✅ प्राचीन भारत का इतिहास Read1 Now

Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास):- “इतिहास भूत/अतीत को समझाने का एक महत्वपूर्ण साधन है. किसी भी देश/समाज के इतिहास के अध्ययन से हमें उस देश या समाज के अतीत को जान सकते हैं और अतीत का आशय उस समाज या राष्ट्र की सभ्यता और संस्कृति होता है. और संसार के प्रत्येक देश अथवा समाज की उसकी सभ्यता तथा संस्कृति से होती है.” 

प्राचीन भारत के इतिहास से हम यह पते हैं कि मानव समाज ने हमारे देश में प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का विकास कब, कैसे, और कहाँ किया.

इतिहास का अध्ययन करने वाले इतिहासकार कहलाते हैं, इतिहास कार एक वैज्ञानिक की तरह उपलब्ध स्रोतों का गहन अध्ययन करके पुराने अतीत का चित्र प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं l

Ancient History of India – प्राचीन भारत का इतिहास

इतिहासकारों ने प्राचीन भारतीय इतिहास को तीन भागों में विभक्त किया है, जो निम्नलिखित हैं-

प्रागैतिहासिक काल मानव की उत्पत्ति से 3000 ई.पू. तक.

आद्य एतिहासिक काल 3000 ई.पू. से 600 ई.पू. तक.

एतिहासिक काल 600 ई.पू. से अब तक.

प्रागैतिहासिक काल मानव की उत्पत्ति से 3000 ई.पू. तक- प्राचीन भारत का वहा काल जिसका कोई लिखित साधन उपलब्ध नहीं है अर्थात् इस काल में मानव ने लिखना, पढ़ना नहीं सिखा था l 

आद्य एतिहासिक काल 3000 ई.पू. से 600 ई.पू. तक- इस काल में मानव ने लिखना सिख लिया था परन्तु आज तक इतिहासकार पढ़ नहीं पाए. इस काल का इतिहास लिखते समय साहित्यिक और पुरातात्विक साधनों पर निर्भर रहना पढ़ता है.

एतिहासिक काल 600 ई.पू. से अब तक- इस काल के मानव ने लिखना पढ़ना बहुत अच्छा सीख लिया था, और मनुष्य बहुत सभ्य हो गया था. इस काल के इतिहास को लिखते समय साहित्यिक, पुरातात्विक, एवं, विदेशी यात्रियों के विवरण आदि की सहायता ली गयी है l भारतीय इतिहास जानने के साधनों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है. (1) पुरातात्विक स्रोत (2) साहित्यिक स्रोत (3) विदेशी रचनाकारों और यात्रियों के विवरण.

  • पुरातात्विक स्रोत-: पुरातात्विक स्रोत प्राचीन भारत को जानने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है इसके अंतर्गत अभिलेख, सिक्के, प्राचीन स्मारक, मूर्तियाँ, एवं चित्रकला आदि आते हैं. पुरातात्विक स्रोतों का अध्ययन करने वाला पुरातत्वविद कहलाता है. नोट- पाण्डुलिपि पुराने समय में हाथ से लिखी पुस्तकें होती है जो सामान्यत: ताड़पत्र अथवा हिमालयी क्षेत्र में पैदा होने वाले भूर्ज नमक पेड़ की छाल से बने भोज-पत्र पर लिखी होती थी. 

अभिलेख -: अभलेखों के अध्ययन को पुरालेखशास्त्र(एपिग्राफी) कहते हैं अभिलेख कई प्रकार के होते हैं जैसे- मुहर, स्तूपों, प्रस्तर स्तंभों, चट्टानों, ताम्रपत्रों, प्राचीन मूर्तियों, मंदिरों की दीवारों पर लिखे अभिलेख. इस अभिलेखों की भाषा प्राकृत, पालि, संस्कृत और अन्य भाषाएँ. कुछ अभिलेख द्विभाषीय भी प्राप्त हुए हैं.

सबसे प्राचीन अभिलेख हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त मुहरों पर मिले हैं. जिनका काल 2500 ई. पू. है हड़प्पा सभ्यता के अभिलेखों को आज तक पढ़ा नहीं जा सका है. Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

1837 ई. में जेम्स प्रिन्सेप ने अशोक के अभिलेखों पढ़ने में सफलता प्राप्त की.

शक शासक रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख संस्कृत भाषा का प्रथम अभिलेख है.

भारत से बाहर सर्वाधिक अभिलेख मध्य एशिया के बोगजकोई से मिले हैं. जिनमे इंद्र, मित्र, वरुण, तथा नासत्य आदि वैदिक देवताओ का उल्लेख प्राप्त होता है. Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

ईरान से प्राप्त नक्श-ए-रुस्तम अभिलेख से ज्ञात होता है की भारत के ईरान से भी सम्बन्ध थे.

सिक्के-: सिक्कों के अध्ययन को मुद्राशास्त्र कहा जाता है. प्राचीन सिक्के सोने, चाँदी, ताँबा, पोटीन, सीसा, जस्ता एवं कांसा आदि से निर्मित होते थे जिन पर विभिन्न प्रकार के चिन्ह अंकित होते थे, इन सिक्को पर कोई लेख नहीं है इसलिए ऐसे सिक्को को आहत सिक्के या पंचमार्क कहते हैं. 

हिन्द यवनों ने भारत में सिक्का निर्माण की “ डाई विधि ” का प्रचालन किया.

सर्वाधिक शुद्ध सोने के सिक्के/मुद्राएं कुषाणों ने जारी की. तथा सबसे ज्यादा सोने के सिक्के/मुद्राओ को गुप्त शासकों ने जारी किया. Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

सातवाहनों ने सीसे की मुद्राओं को चलाया.

अन्य साधन-: अभिलेखों के अलावा स्मारकों, मंदिरों, मूर्तियों, मृद्भांड, चित्रकला आदि के आधार पर भी प्राचीन भारत के इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है- स्मारकों को दो भागों में बांटा जा सकता है (1) देशी (2) विदेशी.- हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, नालंदा, हस्तिनापुर आदि देशी स्मारक की श्रेणी में आते हैं तथा कम्बोडिया, अंकोरवाट बोरोबुदुर मंदिर अदि विदेशी स्मारक की श्रेणी में आते हैं. मृद्भांडो से भी भारत की कलात्मक प्रगति की जानकारी मिलती है.

साहित्यिक स्रोत-: प्राचीन भारतीय साहित्य को दो वर्गों में विभाजित किया गया है- (1) धार्मिक साहित्य (2) धर्मेत्तर साहित्य.

धार्मिक साहित्य- धार्मिक साहित्य के अंतर्गत ब्राह्मण ग्रंथ आते हैं- जैसे- वेद, पुराण, उपनिषद्, अरण्यक, महाभारत, वेदांग, रामायण इत्यादि. ये सब ग्रन्थ प्राचीन भारत धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समाज का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हैं.

भारत के चार प्राचीनतम ग्रन्थ वेद हैं-

ऋग्वेद- ऋग्वेद में मुख्यतः देवी-देवताओं की स्तुति की गयी है. ऋग्वेद एक पद्यात्मक रचना है.

यजुर्वेद- यजुर्वेद को यज्ञ विधान का ग्रन्थ माना जाता हैं इसमें यज्ञ के सभी नियम बताये गए हैं और यहाँ ग्रन्थ भी तत्कालीन समाज की स्थिति को प्रकट करता है.

सामवेद- सामवेद में यज्ञ के अवसर पर उच्चारित किये जाने वाले मन्त्रों का वर्णन करता हैं. Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

अथर्ववेद – इसमें विभिन्न जादू-टोने, तंत्र-मन्त्र, औषधि प्रयोग, रोग-उपचार के बारे में बताया गया है.

वेदांग- वेदों की पुनर्व्याख्या इन वेदांगों में की गयी है. वेदांगो की संख्या 6 है- शिक्षा, कल्प, निरुक्त, व्याकरण, छंद और ज्योतिष आदि.

उपनिषद- ये वेदों के अंतिम भाग माने जा सकते हैं इनमे धर्म, दर्शन और अध्यात्म के गूढ़ और अलौकिक रहस्यों का उल्लेख किया गया है. उपनिषद वेदों के अंतिम भाग होने के कारण वेदांत के नाम से भी जाने जाते हैं. इनकी संख्या 108 है.

सूत्र ग्रन्थ- सूत्रों में ऋषियों ने मनुष्यों के विभिन्न धार्मिक, अध्यात्मिक, सामाजिक कर्तव्यों का वर्णन किया है सूत्रों की संख्या केवल 3 है- गृह सूत्र, धर्म सूत्र, श्रोत सूत्र इत्यादि. Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

स्मृतियां- स्मृतियों का उद्भव सूत्रों की रचना के बाद हुआ है अत: इन्हें धर्मशास्त्र भी कहा जाता है. इनमे मनुष्य के जीवन पर्यन्त कर्तव्यों और कार्यकलापों का जिक्र किया गया हैं. मनु स्मृति, याज्ञवल्क्यस्मृति नारद स्मृति, अंगिरा स्मृति, पराशर स्मृति, कात्यायन स्मृति आदि.

पुराण- प्राचीन भारत की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओ का उल्लेख पुराणों में उपलब्ध होता हैं विष्णु पुराण का सम्बन्ध मौर्य वंश से, वायु पुराण का सम्बन्ध गुप्त वंश से है तथा मत्स्यपुराण  का सम्बन्ध शुंग वंश और सातवाहन वंश से है.

बौद्ध साहित्य- प्राचीन भारत की सामाजिक स्थिति को समझाने के लिए बौद्ध साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है. बौद्ध साहित्य को 3 भागों में विभाजित किया गया है- जातक, पिटक, निकाय आदि.

त्रिपिटक बौद्ध सहित्य का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है तथा त्रिपिटक की रचना गौतम बुद्ध के निर्वाण के पश्चात् हुई थी. वस्तुतः त्रिपिटक तीन ग्रंथों का संयुक्त नाम है जो निम्नलिखित हैं- सुत्तपिटक, विनय पिटक, और अभिधम्मपिटक आदि. इनकी भाषा ‘पालि’ है. इनके अतिरिक्त अन्य प्रमुख बौद्ध ग्रन्थ हैं- मिलिंदपन्हो, दीपवंश, अंगुतरनिकाय, महावंश.

महावस्तु, दिव्यावदान, ललितविस्तार, सारिपुत्र प्रकरण, सौन्दरानंद, बुद्धचरित ये संस्कृत में लिखित बौद्ध ग्रन्थ हैं.

जैन साहित्य- भारतीय समाज का जैन साहित्यिक ग्रन्थ भी भव्य चित्र प्रस्तुत करते हैं प्राचीन जैन ग्रन्थ ‘पर्व’ कहलाते हैं. जैन ग्रंथों में भगवन महावीर के सिद्धांत संकलित हैं जैन साहित्य की भाषा ‘प्राकृत’ है. आगमों को जैन साहित्य में उच्च स्थान प्राप्त है आगम को निम्न प्रकार से विभक्त किया गया है 12 अंग, 12 उपांग, 10 प्रकीर्ण और 6 छंद आदि. Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

आगम जैन ग्रंथो की रचना श्वेताम्बर संप्रदाय के आचार्यों ने की थी. जैन ग्रंथों का अंतिम रूप से संकलन गुजरात के वल्लभी नगर से किया गया.भद्रबाहु चरित, चूर्णी सूत्र, भगवती सूत्र आदि प्रमुख ग्रन्थ हैं.

धर्मेत्तर साहित्य- धर्मेत्तर साहित्य के अंतर्गत ऐतिहासिक, जीवनियों आदि का विशेष महत्वा है. धर्मेत्तर साहित्य में ‘सूत्र’ और ‘स्मृतियों’ का प्रमुख स्थान है. छटी शताब्दी ईशा पूर्व स्म्रतियों की रचना हुई पाणिनी द्वारा रचित अष्टाध्यायी नामक व्याकरण ग्रन्थ है. इधर चाणक्य के अर्थशास्त्र में चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन की जानकारी प्राप्त होती है.

पतंजलि के महाभाष्य और कालिदास के मालविकाग्निमित्र नमक नाटकों से शुंग वंश की जानकारी प्राप्त होती है बाणभट्ट के हर्षचरित्र में सम्राट हर्षवर्धन के शासन की उपलब्धियों का ज्ञान मिलता है. पद्मगुप्त के नवसह्सांकचरित में परमार वंश और जयानक के पृथ्वीराज विजय में पृथ्वीराज चौहान की उपलब्धियाँ प्राप्त होती हैं.

विदेशी विवरण-

भारत में आने वाले अनेक विदेशियों ने तत्कालीन भारत की समाज, संस्कृति, शासन पद्धति का उल्लेख अपने ग्रंथो में किया हैं

अब विदेशी यात्रियोंन के विवरणों को हम तीन भाग में अध्ययन कर सकते हैं जिससे अभ्यर्थियों को पढ़ने में सुविधा होगी l Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

यूनान और रोम के विदेशी यात्री/लेखक-

यूनान और रोम के विदेशी यात्री/लेखकों में सबसे पहले हेरोडोटस एवं टिसियस का नाम आता है. हेरोडोटस को “इतिहास का पिता” कहा जाता है, हेरोडोटस ने पांचवी शताब्दी ई.पू. में अपनी पुस्तक ‘हिस्टोरिका’ में भारत और फारस व्यापारिक राजनैतिक सम्बन्धो का विस्तृत वर्णन किया है.

टिसियस ये एक ईरानी राजवैद्य था इसने भारत और ईरान से सम्बन्धो का जिक्र किया है.

सिकन्दर के साथ भी अनेक यात्री भारत आये जिनमे निर्याकस, आनासिक्रेट्स, अरिस्टोबुलास आदि.

आनासिक्रेट्स ने सिकंदर की सम्पूर्ण जीवनी लिखी थी.

मेगस्थनीज ने अपनी पुस्तक इण्डिका में मौर्य साम्राज्य की भव्य चित्र प्रस्तुत किया है. Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

चीनी यात्रियों के विवरण-

चीनी यात्रियों में ह्वेनसांग, फाह्यान, और इत्सिंग प्रमुख स्थान रखते हैं. फाह्यान की रचना ए रिकॉर्ड ऑफ़ द बुद्धिस्ट कंट्रीज(फ़ो-क्यो-की) में चन्द्रगुप्त द्वितीय के साम्राज्य का विस्तृत उल्लेख मिलता हैं.

इसी प्रकार चाऊ-जू-कुआ ने भारत के चोल साम्राज्य पर प्रकाश डाला है.

तिब्बती लेखक लामा तारानाथ ने अपनी रचनाओं कंग्युर, और तंग्युर में भी भारतीय इतिहास का वरन मिलाता है.

अरब यात्रियों के के विवरण-

आठवीं शताब्दी में अरब के विभिन्न आक्रमणकारियों के साथ भारत भ्रमण के लिए आये लेखको ने भारत की विषय में लिखना शुरू किया नौवीं शताब्दी में सुलेमान नमक अरबी लेखक ने भारत के पाल एवं प्रतिहार शासको के विषय में लिखा इसी प्रकार अलममसूदी ने राष्ट्रकूट शासको के बारे में लिखा और अलबरूनी की महत्वपूर्ण पुस्तक ‘तहकीक ए हिन्द’ गुप्तोतर समाज की स्थिति का पता चलता है.

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FAQ – Ancient History of India

Q. प्राचीन भारत कब से कब तक था?

Ans. भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण १००,००० से ८०,००० वर्ष पूर्व का है।। पाषाण युग (भीमबेटका, मध्य प्रदेश) के चट्टानों पर चित्रों का कालक्रम ४०,००० ई पू से ९००० ई पू माना जाता है।

Q. प्राचीन भारत को कितने भागों में बांटा गया है?

Ans. यह 40 अध्याय में विभाजित है। Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. प्राचीन भारत में श्रेणी कब अस्तित्व में आए?

Ans. ल पूर्व मध्य काल में श्रेणियाँ जाति के रूप में बदल गयी, जिससे श्रेणियों का हृास हुआ तथा इनके स्थान पर मंदिरों को केन्द्र बनाकर एक अलग प्रकार की अर्थ व्यवस्था ने महत्त्व प्राप्त किया। भी श्रेणी बल का संदर्भ मिलता है।

Q. प्राचीन भारत में कितने राज्य थे?

Ans. बौद्ध, जैन धर्म के प्रारंभिक ग्रंथो में महाजनपद नाम के १६ राज्यों का विवरण मिलता है, बौद्ध ग्रन्थ में जिन १६ महाजनपदो का उल्लेख है उनमे अवंति, अश्मक (अस्सक), अंग ,कंबोज ,काशी ,कुरु,कौशल, गांधार, चेदि, वज्जि, वत्स(वृजि),(वंश), पांचाल, मगध, मत्स्य (मच्छ), मल्ल , शूरसेका समावेश था l Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. प्राचीन भारत की क्या विशेषता थी?

Ans. प्राचीन काल में आध्यात्म भावना का बहुत ही ज्यादा प्रचलन था। प्रचीन भारत की संस्कृति हर क्षेत्र को अलग-अलग संस्कृति में लिये होए थी। प्राचीन भारत में अलग-अलग धर्म होने के कारण भी कोई भेद-भाव नहीं था।

Q. प्राचीन काल में भारत का क्या नाम था?

Ans. भारत देश का प्राचीन नाम आर्यावर्त है। आर्यावर्त के पूर्व इसका कोई नाम नहीं था। कहीं-कहीं जम्बूद्वीप का उल्लेख मिलता है।

Q. प्राचीन भारत में कितने प्रकार के पुत्र प्रचलित थे?

Ans. मनु ने बारह प्रकार के पुत्र कहै हैं—औरस, क्षेत्रज, दत्तक, कृत्रिम्, गूढ़ोत्पन्न, अपविद्ध, कानीन, सहोढ, क्रीत, पौनर्भव, स्वयंदत्त और शौद्घ l Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. प्राचीन काल में लोग कैसे रहते थे?

Ans. कई वैज्ञानिक और पुरातत्वविद लंबे समय से मानते आ रहे हैं कि इतिहास के शुरुआती दौर में व्यक्ति 40 से 45 वर्ष से अधिक लंबा जीवन व्यतीत नहीं कर पाते थे, लेकिन हाल ही में ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी ने अध्ययन में पाया कि दवाएं उपलब्ध न होने के बावजूद भी प्राचीनकाल में लोग 90-95 साल तक जिंदा रहते थे

Q. भारत वर्ष की प्राचीनतम संस्कृति कौन सी है?

Ans. भारत की संस्कृति बहुआयामी है जिसमें भारत का महान इतिहास, विलक्षण भूगोल और सिन्धु घाटी की सभ्यता के दौरान बनी और आगे चलकर वैदिक युग में विकसित हुई, बौद्ध धर्म एवं स्वर्ण युग की शुरुआत और उसके अस्तगमन के साथ फली-फूली अपनी खुद की प्राचीन विरासत शामिल हैं।

Q. भारत में कितनी सभ्यता है?

Ans. भारत का इतिहास सिंधु घाटी की सभ्‍यता के जन्‍म के साथ आरंभ हुआ, और अधिक बारीकी से कहा जाए तो हड़प्‍पा सभ्‍यता के समय इसकी शुरूआत मानी जाती है। यह दक्षिण एशिया के पश्चिमी हिस्‍से में लगभग 2500 बीसी में फली फूली, जिसे आज पाकिस्‍तान और पश्चिमी भारत कहा जाता है। Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. सबसे पुराना वंश कौन सा है?

Ans. 1. प्रारंभिक मगध राजवंश (सी. 2500- 2000 ई.पू)
2. बृहद्रथ वंश (सी. 2000 ई. पू. -682 ई.
3. प्रद्योत वंश (सी. 682 ई. पू. -544 ई.
4. हर्यक वंश (सी. 544 ई. पू. – 413 ई.
5. शिशुनाग वंश (सी. 413 ई. पू. – 345 ई.
6. नंद राजवंश (सी. 345 ई. पू.
7. मौर्य वंश (सी. 321 ई. पू.
8. शुंग वंश (सी. 185 ईसा पूर्व – 73 ईसा पूर्व)

Q. इतिहास कितने प्रकार के हैं?

Ans. इतिहास के प्रकार: आर्थिक इतिहास, बौद्धिक इतिहास, राजनीतिक इतिहास, कूटनीतिक इतिहास, सांस्कृतिक इतिहास & सामाजिक इतिहास इत्यादि।

Q. पूर्व इतिहास को इतिहासकारों ने कितने भागों में बाँटा है?

Ans. उन्नीसवीं सदी के मध्य में अंग्रेज़ इतिहासकारों ने भारत के इतिहास को तीन युगों में बाँटा थाः ‘हिंदू’, ‘मुसलिम’ और ‘ब्रिटिश’। Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. प्राचीन भारत के प्रथम इतिहासकार कौन थे?

Ans. हेरोडोटस जो एक प्रसिद्ध यूनानी लेखक था, ने यह लिखा है कि भारतीय युद्ध प्रेमी थे। इसी लेखक के ग्रन्थ से यह भी पता चलता है कि भारत का उत्तरी तथा पश्चिमी देशों से मधुर संबंध था।

Q. प्राचीन भारत का एक प्रसिद्ध राजवंश कौन सा है?

Ans. हर्यक राजवंश (544 – 492 ई.)

Q. प्राचीन भारत का कौन सा स्थान अवंतिका कहलाता था?

Ans. उज्जैन के प्राचीन नाम अवन्तिका, उज्जयनी, कनकश्रन्गा आदि है। उज्जैन मंदिरों की नगरी है। यहाँ कई तीर्थ स्थल है। Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. भारत के प्राचीन देश क्यों कहा जाता है?

Ans. सृष्टि के आदि में आर्यों द्वारा इसे बसाये जाने और उनके यहां रहने के कारण इसका नाम आर्यावर्त था। आर्यावर्त से पूर्व इस देश का अन्य कोई नाम नहीं था और न आर्यों से पूर्व कोई अन्य मनुष्य आदि यहां रहते थे। आर्यावर्त के साथ-साथ प्राचीन काल से ही इसका नाम “भारत” भी व्यवहार में रहा है।

Q. भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता कौन सी है?

Ans. सिंधु घाटी सभ्यता: सिन्धु घाटी सभ्यता ( पूर्व हड़प्पा काल : 3300-2500 ईसा पूर्व, परिपक्व काल: 2600-1900 ई॰पू॰; उत्तरार्ध हड़प्पा काल: 1900-1300 ईसा पूर्व) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है।
इसका विकास सिन्धु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ।

Q. हड़प्पा सभ्यता इतिहास क्या है?

Ans. सिंधु घाटी सभ्यता 3300 ईसापूर्व से 1700 ईसापूर्व तक विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता है। सम्मानित पत्रिका नेचर में प्रकाशित शोध के अनुसार यह सभ्यता कम से कम 8000 वर्ष पुरानी है। यह हड़प्पा सभ्यता और ‘सिंधु-सरस्वती सभ्यता‘ के नाम से भी जानी जाती है। Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. भारत के 7 नाम क्या है?

Ans. भारत को भारतवर्ष ‘जम्बूद्वीप’, भारतखण्ड, आर्यावर्त, हिन्दुस्तान (हिन्दुस्थान), हिन्द आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है।

Q. हिंदी साहित्य के इतिहास को कितने भागों में बांटा गया है?

Ans. इसमें हिंदी साहित्य की विकास-यात्रा के चार काल खण्डों आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिककाल की सामान्य प्रवृत्तियों, कवियों एवं विशिष्टताओं का परिचय प्रस्तुत किया गया है।

Q. विश्व का सबसे प्राचीन राजवंश कौन सा है?

Q. इतिहास से क्या तात्पर्य है?

Ans. इतिहास के अंतर्गत हम जिस विषय का अध्ययन करते हैं उसमें अब तक घटित घटनाओं या उससे संबंध रखनेवाली घटनाओं का कालक्रमानुसार वर्णन होता है। दूसरे शब्दों में मानव की विशिष्ट घटनाओं का नाम ही इतिहास है। या फिर प्राचीनता से नवीनता की ओर आने वाली, मानवजाति से संबंधित घटनाओं का वर्णन इतिहास है।

Q. भारतीय इतिहास के मुख्य स्रोत कौन से हैं?

Ans. हिन्दू धर्म में अनेक ग्रन्थ, पुस्तकें तथा महाकाव्य इत्यादि की रचना की गयी हैं, इनमे प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार से है – वेद, वेदांग, उपनिषद, स्मृतियाँ, पुराण, रामायण एवं महाभारत। इनमे ऋग्वेद सबसे प्राचीन है। इन धार्मिक ग्रंथों से प्राचीन भारत की राजव्यवस्था, धर्म, संस्कृति तथा सामाजिक व्यवस्था की विस्तृत जानकारी मिलती है।

Q. मानव जीवन में इतिहास का क्या महत्व है?

Ans. इतिहास मनुष्य का एक सच्चा शिक्षक है जो समाज को भविष्य का उचित पथ बतलाता है। किसी भी जाति या राष्ट्र को सजीव, उन्नतिशील तथा गतिशील बने रहने के लिए इतिहास का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतिहास हमें मानव प्रकृति के विभिन्न आयामों एवं पक्षों से अवगत कराता है। इसके अध्ययन से हमें सभ्यता के क्रमिक विकास का ज्ञान होता है। Ancient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

Q. प्राचीन काल में भारत की राजधानी क्या थी?

Ans. दिसंबर 1911 तक ब्रिटिश राज के दौरान भारत की राजधानी कलकत्ता (अब कोलकाता) थीAncient History of India (प्राचीन भारत का इतिहास)

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